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खाद्य मंत्री रेखा आर्या ने विभागीय समीक्षा बैठक में दिए अहम निर्देश, राशन विक्रेताओं के भुगतान और पारदर्शिता पर जोर
खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली आमजन के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो सरकारी योजनाओं के तहत सस्ती दरों पर अनाज प्राप्त करते हैं। हालांकि, समय-समय पर इस प्रणाली में विभिन्न चुनौतियां सामने आती हैं, जैसे कि राशन विक्रेताओं को समय पर भुगतान न मिलना, राशन वितरण में पारदर्शिता की कमी, और आवश्यक बुनियादी ढांचे का अभाव। इसी संदर्भ में उत्तराखंड की खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री रेखा आर्या ने विधानसभा स्थित सभागार कक्ष में विभागीय समीक्षा बैठक की।

इस बैठक में ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन, उत्तराखंड के पदाधिकारी तथा सभी जनपदों के जिला पूर्ति अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्री ने राशन विक्रेताओं के लाभांश और भाड़े के भुगतान को लेकर आश्वासन दिया कि विभाग द्वारा जून 2024 तक के परिवहन व्यय तथा सितंबर 2024 तक के लाभांश का भुगतान कर दिया गया है, जबकि शेष राशि के भुगतान की प्रक्रिया जारी है। भारत सरकार से बजट प्राप्त होते ही लंबित राशि का निपटारा जल्द करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, कोविड-19 के दौरान बकाया लाभांश का भुगतान भी शीघ्र किए जाने की बात कही गई।
बैठक में राज्य के सभी 193 गोदामों में धर्मकांटा (वजन तौलने की मशीन) लगाने का मुद्दा भी उठा। रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गोदामों की क्षमता के अनुसार 31 मार्च 2025 तक धर्मकांटा लगाने की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि राशन विक्रेताओं और लाभार्थियों को घटतौली जैसी समस्याओं से बचाया जा सके।
राशनकार्ड प्रणाली में सुधार की दिशा में भी अहम निर्णय लिए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश में राशनकार्ड बनाने की प्रक्रिया को 10 दिनों के भीतर पूरा किया जाता है। अब राशनकार्ड को पीवीसी कार्ड के रूप में उपलब्ध कराने के लिए जिला आपूर्ति अधिकारियों द्वारा मशीनें खरीदी जाएंगी। साथ ही, भविष्य में ई-पॉज मशीनों के माध्यम से राशन वितरण किए जाने की योजना पर भी चर्चा हुई, जिसके लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि एसएफआई के तहत राशन कार्ड धारकों को मिलने वाले अनाज की धनराशि में वृद्धि का प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद राशन डीलरों को लगभग 180 रुपये प्रति कुंतल का लाभ मिल सकता है।
महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रिक्त सस्ता गल्ला दुकानों के पदों पर महिलाओं को आरक्षण देने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव को शासन स्तर पर परीक्षण के लिए भेजा गया है और जल्द ही इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में खाद्य सचिव एल. फनई, खाद्य आयुक्त हरिचंद्र सेमवाल, अपर आयुक्त पी.एस. पांगती, अपर सचिव रुचि मोहन रयाल, ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन, उत्तराखंड के अध्यक्ष रेवाधर ब्रजवासी समेत अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
हाईलाइट्स:
- राशन विक्रेताओं को जून 2024 तक का परिवहन व्यय और सितंबर 2024 तक का लाभांश भुगतान किया गया, शेष राशि जल्द जारी होगी।
- सभी 193 गोदामों में 31 मार्च 2025 तक धर्मकांटा लगाने के निर्देश, घटतौली रोकने पर जोर।
- राशनकार्ड अब पीवीसी रूप में जारी होंगे, जिला स्तर पर मशीन खरीदने के निर्देश।
- ई-पॉज मशीन से राशन वितरण के लिए ट्रेनिंग व्यवस्था की जाएगी।
- राशन डीलरों को 180 रुपये प्रति कुंतल अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना।
- सस्ता गल्ला दुकानों में महिलाओं को आरक्षण देने का प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजा गया।



