Friday, February 13, 2026
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चकराता-त्यूनी में पहली बार डीएम का तीन दिवसीय प्रवास, 200 वन पंचायतों के कान्क्लेव और हनोल मंदिर विस्तारीकरण पर होगा मंथन

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चकराता-त्यूनी के दुर्गम क्षेत्रों में डीएम का तीन दिवसीय प्रवास, वन पंचायतों के सुदृढ़ीकरण पर होगा मंथन

दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी हमेशा से एक चुनौती रही है। स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, सड़क संपर्क और आपदा प्रबंधन जैसी आवश्यक सुविधाओं का इन क्षेत्रों तक समुचित पहुंच न होना स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर को प्रभावित करता है। ऐसे में, शासन की ओर से इन समस्याओं के समाधान के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी क्रम में, जिला प्रशासन ने दुर्गम क्षेत्रों में विकास कार्यों को मूर्त रूप देने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं के अनुरूप जिला प्रशासन अब दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसी क्रम में, डीएम सविन बंसल का मार्च के तीसरे सप्ताह में चकराता और त्यूनी क्षेत्र में तीन दिवसीय प्रवास प्रस्तावित है। इस दौरान, वे विभिन्न अधिकारियों के साथ क्षेत्रवासियों की समस्याओं के समाधान हेतु व्यापक स्तर पर बहुउद्देशीय शिविरों का आयोजन करेंगे।

डीएम के प्रवास के दौरान कोटी कनासर में नवगठित 200 वन पंचायतों का कान्क्लेव आयोजित किया जाएगा, जिसमें वन पंचायतों को आपदा मद से पहली बार आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस सहायता का उद्देश्य वन पंचायतों को सुदृढ़ बनाना और वनाग्नि रोकथाम के लिए उनकी क्षमता बढ़ाना है। इससे वन क्षेत्रों में आग लगने की घटनाओं को नियंत्रित करने और फायर वॉचरों की संख्या में वृद्धि करने में मदद मिलेगी।

इसके अतिरिक्त, हनोल मंदिर परिसर में स्थानीय निवासियों, पुरोहितों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मंदिर के मास्टर प्लान और विस्तारीकरण को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसमें स्थानीय हितों और सुझावों को समाविष्ट करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

डीएम के प्रवास के दौरान बहुउद्देशीय शिविरों में पेंशन, स्वास्थ्य जांच, विभिन्न प्रमाण पत्रों के निर्गमन सहित कई सेवाएं मौके पर ही प्रदान की जाएंगी। यह पहली बार होगा जब कोई डीएम तीन दिनों तक दुर्गम क्षेत्रों में रहकर स्थानीय समस्याओं का प्रत्यक्ष अवलोकन करेंगे और उनके समाधान के लिए तत्पर रहेंगे।


 

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