Friday, February 13, 2026
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देहरादून: एनीमिया और टीबी मुक्त अभियान शुरू, शिक्षक और छात्र निभाएंगे अहम भूमिका

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क्षय रोग (टीबी) और एनीमिया देश में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बने हुए हैं, जिनका सीधा असर लोगों की उत्पादकता, जीवन गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। टीबी एक संक्रामक रोग है, जो समय पर इलाज न मिलने पर घातक साबित हो सकता है, जबकि एनीमिया पोषण की कमी से होने वाली बीमारी है, जिससे विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे प्रभावित होते हैं। सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत विभिन्न स्तरों पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड में भी एक व्यापक अभियान शुरू किया जा रहा है, जिसमें शिक्षकों और विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड को 2025 तक एनीमिया एवं टीबी मुक्त बनाने के लिए एक सघन जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसमें विद्यालयी शिक्षा से लेकर महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों व छात्र-छात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सभी राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी “नि-क्षय मित्र” बनकर एक-एक टीबी मरीज को गोद लेंगे।

प्रदेश के विद्यालयी एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अपने शासकीय आवास पर उच्च एवं विद्यालयी शिक्षा विभाग की संयुक्त बैठक आयोजित की। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि दोनों विभाग सामाजिक दायित्वों के तहत प्रदेशभर में जनजागरूकता अभियान चलाकर एनीमिया एवं टीबी मुक्त भारत अभियान में अपनी भागीदारी निभाएंगे।

इस अभियान के तहत विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर गोष्ठियों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विशेषज्ञ कुपोषण से होने वाले एनीमिया को समाप्त करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सामाजिक संगठनों के सहयोग से छात्र-छात्राओं की टीबी व एनीमिया की जांच की जाएगी।

रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पहले से टीबी मुक्त अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत विभिन्न संस्थाओं, विभागों और लोगों द्वारा अब तक लगभग 14,000 टीबी मरीजों को गोद लिया जा चुका है। इनमें से कई मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। राज्य के 5,000 गांवों को भी टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों को इस सामाजिक कार्य में स्वैच्छिक रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया है। बैठक में उच्च शिक्षा सचिव रणजीत सिन्हा, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. अंजू अग्रवाल, सलाहकार रूसा प्रो. एम.एस.एम. रावत, प्रो. के.डी. पुरोहित, प्रभारी निदेशक बेसिक शिक्षा अजय कुमार नौडियाल, प्रभारी निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल सती, उप सचिव उच्च शिक्षा ब्योमकेश दुबे और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


 

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