Wednesday, February 11, 2026
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चमोली: माणा गांव में हिमस्खलन राहत अभियान समाप्त, 8 की मौत, 46 श्रमिकों को बचाया गया

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उत्तराखंड के चमोली में हिमस्खलन त्रासदी: बचाव कार्य समाप्त, 8 श्रमिकों की मौत

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अक्सर प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है, जिससे जन-धन की हानि होती है। खासतौर पर ऊंचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन जैसी घटनाएं न केवल स्थानीय लोगों बल्कि वहां कार्यरत श्रमिकों के लिए भी बड़ा खतरा बन जाती हैं। हाल ही में चमोली जिले के माणा गांव के पास हुए हिमस्खलन ने कई जिंदगियों को प्रभावित किया, जहां राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया गया।

हिमस्खलन राहत अभियान की समीक्षा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित आपदा परिचालन केंद्र में पहुंचकर चमोली के माणा गांव के पास हुए हिमस्खलन में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए चलाए जा रहे राहत कार्यों की जानकारी ली। इस दौरान अधिकारियों को लापता श्रमिकों की खोज में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

राहत कार्य में विभिन्न एजेंसियों की तैनाती

घटनास्थल पर भारतीय सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ समेत अन्य बचाव दलों ने अभियान को पूरी मुस्तैदी के साथ अंजाम दिया। लापता श्रमिकों को खोजने के लिए आधुनिक उपकरणों जैसे ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR), स्निफर डॉग्स, थर्मल इमेजिंग कैमरा और विक्टिम लोकेशन कैमरा का इस्तेमाल किया गया, ताकि बर्फ में दबे लोगों को जल्द से जल्द खोजा जा सके।

बचाव अभियान का निष्कर्ष

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे में कुल 54 श्रमिक फंस गए थे, जिनमें से 46 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 8 लोगों की दुखद मृत्यु हो गई। इस आपदा से प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई है और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई है।

प्रधानमंत्री और केंद्रीय सरकार का सहयोग

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस बचाव अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से राहत कार्य त्वरित और प्रभावी तरीके से संचालित हो सका। राज्य प्रशासन की ओर से प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को इस सहायता के लिए आभार व्यक्त किया गया है।

बचाव दलों की सराहना

राहत कार्य में जुटे स्थानीय प्रशासन, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों के साहस और समर्पण को मुख्यमंत्री ने नमन किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद इन दलों ने अदम्य साहस का परिचय दिया और श्रमिकों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया।


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