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सीएम हेल्पलाइन और शिकायत निवारण प्रणाली: जनसेवा में पारदर्शिता और दक्षता की आवश्यकता
लोक शिकायत निवारण प्रणाली सरकार और जनता के बीच विश्वास की कड़ी है। शिकायतें नागरिकों की समस्याओं, उत्पीड़न और आवश्यकताओं का प्रतिबिंब होती हैं, जिनका त्वरित निस्तारण प्रशासनिक संवेदनशीलता दर्शाता है। इन्हें महज आंकड़ों की जगह समाधान के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। देहरादून जनपद में सीएम हेल्पलाइन और सीपीग्राम प्रणाली के माध्यम से शिकायत निवारण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 मार्च 2025 को जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में सीएम हेल्पलाइन और केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण प्रणाली (सीपीग्राम) पर लंबित शिकायतों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिकायतें “उत्पीड़न, अभाव और मांग” का संकेतक हैं, न कि महज आंकड़े। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रथम पंक्ति के अधिकारी अपने स्तर पर ही शिकायतों का निस्तारण करें और एक सप्ताह के भीतर समाधान सुनिश्चित करें। साथ ही, मुख्यमंत्री की समीक्षा में जिले को अव्वल रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
जिलाधिकारी ने वन विभाग, सिंचाई, पेयजल और विद्युत विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित शिकायतों का विस्तृत विवरण और रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करें। उन्होंने बैठक में अधूरी जानकारी लेकर आने वाले अधिकारियों पर नाराजगी जताई और सख्त हिदायत दी कि नियमावली का पालन करते हुए शिकायतों का निस्तारण किया जाए। कुछ विभागों के अधिकारियों द्वारा बैठक में अनुपस्थित रहने पर भी असंतोष व्यक्त किया गया।
पुलिस अधीक्षक नगर को निर्देश दिए गए कि पुलिस से संबंधित शिकायतों का एक सप्ताह के भीतर निस्तारण करें। इसके अलावा, इंजीनियरिंग विभागों को एल-1 स्तर की शिकायतों की स्वत: समीक्षा करने को कहा गया। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि सीएम हेल्पलाइन की प्राथमिकता सर्वोच्च है और इसमें कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, नगर आयुक्त हेमंत कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, अधीक्षण अभियंता लोनिवि परमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन ने सभी विभागों से समन्वय बनाकर जनशिकायतों के प्रति गंभीरता दिखाने का आग्रह किया।
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