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देहरादून जनपद में नंदा-सुनंदा योजना: गरीब और अनाथ बेटियों की पढ़ाई को नया जीवन
शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है, लेकिन आर्थिक तंगी और पारिवारिक विपदाओं के कारण कई बेटियां अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं। ऐसी बेटियों के लिए शिक्षा का सपना साकार करना न केवल उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाता है, बल्कि समाज को भी सशक्त और समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। देहरादून जनपद में जिला प्रशासन की नंदा-सुनंदा योजना ऐसी ही बेटियों के लिए वरदान साबित हो रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 मार्च 2025 को जिलाधिकारी सविन बंसल ने नंदा-सुनंदा योजना के तहत तीन और गरीब और अनाथ बेटियों की पढ़ाई के लिए 97,955 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। इस योजना के तहत अब तक 11 बेटियों की पढ़ाई और कौशल विकास के लिए आर्थिक सहायता जारी की जा चुकी है। जिलाधिकारी ने कहा कि गरीब, अनाथ और विषम परिस्थितियों में रहकर पढ़ाई करने वाली बेटियां ही समाज की असली नंदा और सुनंदा हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में यह योजना बेटियों को सशक्त बनाने और उनके भविष्य को संवारने के लिए शुरू की गई है।
इस अवसर पर अस्मित कौर, त्रिशा कंडारी और खुशबू को आर्थिक सहायता प्रदान की गई। अस्मित कौर को कक्षा 4 की पढ़ाई के लिए 12,250 रुपये, त्रिशा कंडारी को कक्षा 7 की पढ़ाई के लिए 63,480 रुपये और खुशबू को श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई के लिए 22,225 रुपये की सहायता दी गई। जिलाधिकारी ने कहा कि इस योजना के तहत फंड की कमी नहीं होने दी जाएगी और हर संभव प्रयास किया जाएगा कि कोई भी बेटी शिक्षा से वंचित न रहे।

नंदा-सुनंदा योजना की शुरुआत जिलाधिकारी सविन बंसल ने नैनीताल जिले में की थी, जहां 60 बालिकाओं को शैक्षणिक और कौशल विकास में सहायता प्रदान की गई। देहरादून जनपद में भी इस योजना को लागू करके गरीब और अनाथ बेटियों के भविष्य को संवारने का काम किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि जनता दरबार, बहुउद्देशीय शिविर और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से ऐसी बेटियों का चयन किया जा रहा है, जिन्हें आर्थिक सहायता की आवश्यकता है।
इस कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला समाज कल्याण अधिकारी पूनम चमोली, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट सहित अन्य अधिकारी और बालिकाओं के परिजन उपस्थित रहे।



