आप को बता दे
हर साल प्राकृतिक आपदाएं सैकड़ों लोगों की जान लेती हैं और हजारों परिवारों को उजाड़ देती हैं। बाढ़, भूस्खलन, बादल फटने जैसी घटनाओं से उत्तराखंड हर साल जूझता है। लेकिन असली सवाल यह है—क्या हम इन आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं? बीते वर्षों में आपदा राहत कार्यों में कई खामियां उजागर हुई हैं, जिनमें समय पर बचाव दल न पहुंचना, पुनर्वास में देरी, और राहत सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। इन्हीं मुद्दों पर मंथन करने के लिए नई टिहरी में आपदा प्रबंधन की समीक्षा बैठक बुलाई गई, जहां अधिकारियों को आपदा से पहले तैयारियों को मजबूत करने और पारदर्शिता बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए।
आपदा प्रबंधन की समीक्षा बैठक: बीते वर्ष की गलतियों से सबक लेने पर जोर
नई टिहरी स्थित जिला कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने आपदा प्रबंधन की समीक्षा बैठक ली। बैठक में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। रिपोर्ट्स के अनुसार, उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आपदा राहत कार्यों में पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित की जाए। बीते वर्षों में आई आपदाओं के दौरान राहत प्रयासों में जो कमियां रह गई थीं, उन्हें सुधारने पर विशेष जोर दिया गया।
आपदा राहत कार्यों में क्या रहा फोकस?
- आपदा से पहले की तैयारी:
- अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि राहत इंतजाम समय रहते पूरे किए जाएं।
- जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने से पारदर्शिता बनी रहेगी।
- केवल पत्राचार करना समाधान नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने की आवश्यकता है।
- बीते वर्ष की आपदाओं का आकलन:
- रिपोर्ट के अनुसार, घनसाली क्षेत्र की आपदा में 8 लोगों की जान गई थी।
- प्रभावित परिवारों को मुआवजा वितरित किया गया और 200 परिवारों का विस्थापन किया गया।
- प्रभावित गांवों में बिजली और पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की गई, जिसे अब स्थायी किया जा रहा है।
- पुनर्निर्माण एवं विकास कार्य:
- पुनर्निर्माण के लिए पीएमजीएसवाई के तहत 7 करोड़ की योजना भेजी गई।
- बूढ़ाकेदार क्षेत्र में सुरक्षा कार्यों के लिए 21 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।
- गंगी गांव में सौर ऊर्जा पर निर्भरता खत्म कर 12 किमी बिजली लाइन बिछाने का काम अगले दो माह में पूरा होगा।
अधिकारियों को कड़े निर्देश, लापरवाही बर्दाश्त नहीं
- सड़कों के निर्माण में मलबे का डंपिंग जोन में ही निपटान करने के निर्देश, ताकि नए आपदा जोन न बनें।
- आपदा में क्षतिग्रस्त स्कूलों में सुरक्षा उपायों का निरीक्षण करने के आदेश।
- खाद्य आपूर्ति विभाग को राहत शिविरों में वितरित होने वाली चीनी और चावल की गुणवत्ता की निगरानी के निर्देश।
- पशुपालन विभाग से आपदा के दौरान हुए पशु हानि की जानकारी लेकर राहत कार्यों की समीक्षा।
- रेलवे निर्माण कार्य से प्रभावित पेयजल व्यवस्था पर चर्चा, स्थायी समाधान के लिए धनराशि की मांग।
बीआरओ अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी
बैठक में बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, उपाध्यक्ष ने सड़क निर्माण में हो रही देरी और मलबा हटाने में लापरवाही को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाई। एडीएम को निर्देश दिए गए कि ओसी बीआरओ से पत्राचार कर स्पष्टीकरण मांगा जाए।
भविष्य की तैयारी और प्रशासन की योजना
आपदा प्रबंधन के तहत अगले कुछ महीनों में पुनर्वास कार्यों को पूरा करने, राहत सामग्री की गुणवत्ता सुधारने, और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की कोशिश है कि आपदा के समय प्रभावित लोगों को समय पर मदद मिल सके और पुनर्वास कार्यों में किसी तरह की देरी न हो।
अब सवाल यह है…
उत्तराखंड में हर साल आपदाओं का खतरा बना रहता है। सरकार और प्रशासन अपनी ओर से राहत कार्यों की योजनाएं तो बना रहे हैं, लेकिन क्या ये योजनाएं जमीनी स्तर पर असरदार साबित होंगी? क्या पीड़ितों को समय पर मुआवजा और राहत मिल पाएगी? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब आने वाले वक्त में ही मिल पाएगा।



