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टिहरी बांध विस्थापितों को पुनर्वास की सौगात: जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की मौजूदगी में 35 कास्तकारों को लॉटरी से मिले आवासीय भूखंड
विस्थापन की मार झेल रहे लोगों के लिए राहत, पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
बड़े विकास परियोजनाओं की वजह से विस्थापन झेलना कई परिवारों के लिए एक गंभीर चुनौती बन जाता है। वर्षों तक अपने हक की प्रतीक्षा कर रहे लोग सरकार की पुनर्वास योजनाओं पर आश्रित होते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें अपने अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है। टिहरी बांध परियोजना के अंतर्गत विस्थापित हुए कई कास्तकारों के लिए यह इंतजार अब खत्म हुआ है। टिहरी जिला प्रशासन ने लॉटरी के माध्यम से 35 पात्र विस्थापितों को आवासीय भूखंड आवंटित किए, जिससे पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई।

लॉटरी प्रक्रिया से हुआ भूखंडों का आवंटन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 25 फरवरी 2025 को शासन द्वारा गठित समिति की देखरेख में टिहरी पुनर्वास निदेशालय में यह प्रक्रिया संपन्न हुई। इस दौरान जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुनर्वास निदेशक, टीएचडीसी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। आवंटन प्रक्रिया में दो डिब्बों का प्रयोग किया गया—पहले में कास्तकारों के नाम और दूसरे में आवासीय भूखंडों की पर्चियां रखी गईं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उपस्थित कास्तकारों से ही पर्चियां निकलवाई गईं और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई।

किन क्षेत्रों में मिले आवासीय भूखंड?
लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में कुल 35 भूखंड आवंटित किए गए:
- फूलसैणी, देहरादून – 02 भूखंड
- भानियावाला अठूरवाला – 01 भूखंड
- घमण्डपुर रैनापुर ग्रांट, रानीपोखरी, देहरादून – 33 भूखंड
प्रशासन की कड़ी निगरानी और निर्देश
जिलाधिकारी ने पुनर्वास एवं टीएचडीसी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूखंडों का आवंटन पूरी तरह पुनर्वास नियमावली के अनुसार हो और पात्र लाभार्थियों को जल्द से जल्द कब्जा सौंपा जाए। इस मौके पर अधीक्षण अभियंता पुनर्वास आर.के. गुप्ता, महाप्रबंधक टीएचडीसी विजय सहगल, एसडीएम टिहरी अपूर्वा सिंह और अधिशासी अभियंता पुनर्वास अनूप कुमार डियूंडी भी उपस्थित रहे।
विस्थापितों के लिए राहत, प्रशासन पर भरोसा बढ़ा
इस आवंटन प्रक्रिया से वर्षों से इंतजार कर रहे विस्थापित कास्तकारों को एक बड़ी राहत मिली है। प्रशासन द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने से लोगों का पुनर्वास नीति पर भरोसा मजबूत हुआ है। हालांकि, विस्थापितों की अन्य लंबित समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन को और भी प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।



