आप को बता दे
नई टिहरी में ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा बैठक, पहाड़ी क्षेत्रों के लिए नीतिगत बदलाव के सुझाव
ग्रामीण विकास में बाधाएं: पहाड़ी क्षेत्रों की चुनौतियां
ग्रामीण विकास योजनाएं देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौतियां इनके प्रभाव को सीमित कर सकती हैं। खासतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में, जहां संसाधन सीमित हैं और बुनियादी ढांचे की कमी है, वहां योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से नहीं हो पाता। इन समस्याओं को समझने और उनके समाधान खोजने के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर समीक्षा की जाती है, जिससे विकास की गति तेज हो सके और लाभार्थियों तक सही समय पर मदद पहुंचाई जा सके।

नई टिहरी में बैठक, योजनाओं की समीक्षा और बदलाव के प्रस्ताव
सोमवार, 24 फरवरी 2025 को विकास भवन सभागार, नई टिहरी में भारत सरकार की ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में 7वें कॉमन रिव्यू मिशन (सीआरएम) के सदस्य मानस की अध्यक्षता में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन, उनकी चुनौतियों और प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों ने योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखे।
महात्मा गांधी नरेगा में बदलाव की मांग
बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता से उठाया गया। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों में अंतर के कारण कार्य प्रगति समान नहीं हो पाती। इसे ध्यान में रखते हुए सुझाव दिया गया कि—
- पर्वतीय क्षेत्रों के लिए योजना में कुछ विशेष बदलाव किए जाएं।
- सामग्री अंश मजदूरी अनुपात के अनुसार समय पर आवंटित किया जाए, जिससे छोटे व्यापारियों को आर्थिक समस्याओं का सामना न करना पड़े।
- पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण सामग्री के परिवहन पर अधिक खर्च आता है, इसलिए लागत बढ़ाने के नियमों में संशोधन किया जाए।
- कार्य स्थल का चयन अधिकतम एक किलोमीटर के भीतर हो और आने-जाने का समय भी कार्य अवधि में जोड़ा जाए।
आवास योजनाओं में सुधार के सुझाव
बैठक में यह भी बताया गया कि मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में आवास योजना के तहत स्वीकृत धनराशि समान होती है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में भूमि सुधार, सामग्री ढुलाई और निर्माण लागत अधिक आती है। ऐसे में मानकों में बदलाव करने की जरूरत बताई गई।

पीएमजीएसवाई में स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता देने की सिफारिश
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत नई सड़कों के निर्माण कार्य में स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया, जिससे कि सड़कों की देखभाल बेहतर ढंग से हो सके और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिले।
स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए एनआरएलएम में बदलाव
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़े कार्मिकों को विशेष प्रशिक्षण देने की मांग की गई, जिससे वे गांव की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर सकें। बैठक में कहा गया कि—
- ग्रामीण लोग अक्सर व्यवसाय शुरू करने से हिचकिचाते हैं, लेकिन यदि उन्हें सहभागिता के साथ प्रशिक्षित किया जाए, तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
- समूहों द्वारा अर्जित आय की निगरानी की जाए और इसे बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
ग्रामीण विकास की दिशा में सकारात्मक कदम
बैठक में सामने आए सुझावों को भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों तक पहुंचाने और आवश्यक बदलावों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया। सरकार की ओर से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्रामीण विकास योजनाएं पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से प्रभावी बनें, ताकि देश के हर नागरिक को उनका पूरा लाभ मिल सके।



