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97 वर्षीय बुजुर्ग को मिला इंसाफ: 25 साल बाद अपनी जमीन पर दोबारा रखा कदम
क्या किसी की अपनी जमीन पर हक पाने के लिए 25 साल तक भटकना पड़ सकता है?
उत्तराखंड में एक 97 वर्षीय बुजुर्ग महिला और उनकी 80 वर्षीय बेटी को न्याय पाने के लिए दशकों तक दर-दर भटकना पड़ा। उनकी अपनी ज़मीन पर अवैध कब्जा था, जिस पर एक गैस गोदाम वर्षों से संचालित हो रहा था। सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। लेकिन जब मामला जिलाधिकारी की अदालत में पहुंचा, तो प्रशासन हरकत में आया और त्वरित कार्रवाई करते हुए बुजुर्ग महिला को उनकी जमीन पर कब्जा दिलाया।

25 साल पुराना विवाद: न्याय की आस में बीते दशक
रिपोर्ट्स के अनुसार, 97 वर्षीय लीला देवी और उनकी 80 वर्षीय बेटी नीना गुरुंग पिछले 25 वर्षों से अपनी 12,000 वर्ग फीट जमीन को वापस पाने के लिए सरकारी कार्यालयों और अदालतों के चक्कर काट रही थीं। यह जमीन उनके पति ने 1988 में 10 साल की लीज पर गैस गोदाम संचालन के लिए दी थी। लेकिन लीज खत्म होने के बाद भी संचालक ने न तो किराया चुकाया और न ही जमीन खाली की। इसके उलट, अभिलेखों में हेरफेर कर जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया।
डीएम की सख्ती: गैस गोदाम सील, कब्जा मुक्त
जिलाधिकारी सविन बंसल को जब जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान यह मामला संज्ञान में आया, तो उन्होंने तुरंत जांच के आदेश दिए। रिपोर्ट में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद प्रशासन ने 3 जनवरी 2025 को अवैध रूप से संचालित गैस गोदाम को सील कर दिया। इसके बाद, 19 फरवरी को जिलाधिकारी के निर्देशानुसार उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी ने टीम के साथ मौके पर पहुंचकर महिला को उनकी जमीन पर पुनः कब्जा दिलाया।

जनता का भरोसा बढ़ा, बुजुर्ग महिला ने दी प्रतिक्रिया
कई सालों बाद अपनी जमीन की चाबी पाकर लीला देवी ने प्रशासन को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि अपने जीवन के इस पड़ाव में उन्हें अपनी ही जमीन के लिए इतनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से अब जनता को भरोसा हो गया है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने पर न्याय जरूर मिलेगा।
प्रशासन की कड़ी चेतावनी: अवैध कब्जों पर होगी कार्रवाई
रिपोर्ट के अनुसार, जिलाधिकारी बंसल ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले विभागीय अधिकारियों से भी जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थितियां दोबारा न हों, इसके लिए अवैध कब्जों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने अवैध रूप से संचालित गैस गोदाम का लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
न्याय की नई मिसाल: प्रशासन की त्वरित कार्रवाई का असर
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि अगर प्रशासन ईमानदारी से काम करे, तो वर्षों से लंबित मामलों का समाधान कुछ ही दिनों में किया जा सकता है। यह मामला उन हजारों लोगों के लिए एक प्रेरणा बन सकता है, जो अपनी जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।



