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क्या खुले में शराब पीना अपराध नहीं? पुलिस की सख्ती के बावजूद क्यों नहीं सुधर रहे लोग?
शराब का नशा सिर्फ व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे समाज को नुकसान पहुंचाता है। सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह आम नागरिकों की सुरक्षा और शांति के लिए भी खतरा बनता है। खुले में शराब पीने और शराब के नशे में गाड़ियों को दौड़ाने की वजह से सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। पुलिस लगातार अभियान चला रही है, लेकिन सवाल उठता है—क्या सिर्फ चालान काटने से इस समस्या का समाधान संभव है?

दून पुलिस का कड़ा एक्शन: 135 लोगों को हिरासत में लिया गया
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून पुलिस ने 12 फरवरी 2025 को सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और गाड़ियों में बैठकर नशा करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। इस दौरान शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में चेकिंग की गई और कुल 135 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया।
पुलिस कार्रवाई में प्रमुख बिंदु:
- सार्वजनिक स्थानों और सड़क किनारे शराब पीते पाए गए 135 व्यक्तियों को पुलिस थाने लाया गया।
- सभी के खिलाफ पुलिस अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई की गई।
- कुल ₹46,500 का जुर्माना वसूला गया।
- सभी को भविष्य में दोबारा ऐसा न करने की सख्त चेतावनी दी गई।
शराबियों की बारात लेकर पुलिस पहुँची थाने!
देहरादून पुलिस के इस अभियान को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा हो रही है। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए शराबियों को जब थाने लाया गया तो लोगों ने इसे “शराबियों की बारात” का नाम दिया। यह मज़ाकिया लग सकता है, लेकिन हकीकत यह है कि इस तरह की लापरवाह हरकतें समाज में गंभीर खतरे पैदा कर रही हैं।

क्या सिर्फ चालान काटने से समस्या हल होगी?
प्रशासन द्वारा लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल चालान काटना और जुर्माना वसूलना पर्याप्त है? नशे के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए कड़ी सजा और समाज में जागरूकता अभियान की जरूरत है।
जनता और प्रशासन को मिलकर बनानी होगी रणनीति
पुलिस की ओर से सख्ती जरूरी है, लेकिन समाज को भी इस समस्या के खिलाफ आगे आना होगा। अगर लोग जागरूक हों, शराब पीकर गाड़ी न चलाएं, सार्वजनिक स्थानों पर शराब न पिएं, और अपने आसपास के लोगों को भी ऐसा करने से रोकें, तो इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।



