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उत्तराखंड में वनाग्नि से निपटने की तैयारी तेज, राज्य स्तर पर मॉकड्रिल का आयोजन
देहरादून, 13 फरवरी 2025
हर साल उत्तराखंड के जंगलों में भयंकर आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे न केवल बहुमूल्य वन संपदा नष्ट होती है, बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचता है। वन्य जीवों के लिए यह आग विनाशकारी साबित होती है, जिससे उनकी जान पर खतरा मंडराने लगता है। कई बार ये आग रिहायशी इलाकों तक भी पहुंच जाती है, जिससे आम जनता की सुरक्षा प्रभावित होती है। इन चुनौतियों से निपटने और वनाग्नि की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा उत्तराखंड में एक राज्य स्तरीय फॉरेस्ट फायर मॉकड्रिल का आयोजन किया गया।
राज्यभर में चला मॉक अभ्यास
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड में वनाग्नि रोकथाम के उद्देश्य से जनपद स्तर पर व्यापक अभ्यास किया गया। जनपद देहरादून में आग लगने की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी सविन बसंल ने आईआरएस सिस्टम को सक्रिय किया और अमलाव (कालसी), थानो (लाम्बीराव), एवं ओखला (रायपुर) में वनाग्नि पर नियंत्रण हेतु तत्काल टीमों को संसाधनों के साथ रवाना किया।

मुख्यमंत्री ने सचिवालय राज्य आपदा परिचालन केंद्र से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों से संवाद कर तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को वनाग्नि से निपटने हेतु अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए और वन विभाग के साथ ही सामाजिक संगठनों, गैर सरकारी संगठनों, महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों और वन पंचायतों को भी इस मुहिम में जोड़ा जाए।
वनाग्नि रोकथाम के लिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने आई.टी. पार्क देहरादून में आयोजित इस अभ्यास के दौरान निर्देश दिया कि वनाग्नि की घटनाओं में शामिल असामाजिक तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने वनाग्नि नियंत्रण के लिए सभी विभागों को एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता बताई और प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु को निर्देश दिया कि सभी विभागों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक पत्र जारी किया जाए।
स्थानीय स्तर पर मुस्तैदी
आज सुबह करीब 08 बजे जिला आपदा परिचालन केंद्र को सूचना मिली कि जनपद के विकासखंड कालसी के अमलाव, रायपुर के ओखला एवं थानो के जंगलों में भीषण आग लगी है। जिलाधिकारी ने तत्काल आईआरएस को सक्रिय किया और तीनों स्थलों पर स्टेजिंग एरिया स्थापित कराते हुए इंसीडेंट कमांडर को वनाग्नि पर नियंत्रण हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
तीनों स्थानों पर स्थानीय स्वयंसेवकों और निवासियों की सहायता से वनाग्नि पर काबू पाने का मॉक अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इस दौरान सभी विभागों ने अपने-अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। मॉकड्रिल के उपरांत डी-ब्रीफिंग सत्र में उच्चाधिकारियों ने इस अभ्यास की सफलता और इसमें आई कमियों का विश्लेषण किया, जिससे भविष्य में बेहतर समन्वय स्थापित कर वनाग्नि की घटनाओं से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।

अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी
इस अभ्यास में जिलाधिकारी सविन बसंल, एसएसपी अजय सिंह, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा, अपर जिलाधिकारी जयभारत सिंह, अपर मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सी.एस. रावत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कालसी में उप जिलाधिकारी गौरी प्रभात, ओखला रायपुर में एसडीएम हरिगिर और थानो में उप जिलाधिकारी डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल ने इंसीडेंट कमांडर की भूमिका निभाई और अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।



