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हरिद्वार: हास्य के माध्यम से समाज को जागरूक करने वाले गढ़वाली फिल्मों के प्रसिद्ध कलाकार स्व. घनानंद उर्फ़ घन्ना भाई का आज हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। कला जगत के इस चमकते सितारे का यूं अचानक चले जाना उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।
मिली जानकारी के अनुसार, हरिद्वार से सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अंतिम संस्कार में शामिल हुए और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी। उन्होंने कहा, “घन्ना भाई का इस तरह हमें छोड़कर चले जाना बेहद दुखद है। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।”

इस अवसर पर स्थानीय विधायक मदन कौशिक, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता, समाजसेवी और गढ़वाली फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकार भी मौजूद रहे। सभी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें उत्तराखंड के हास्य और लोक कला जगत का अमूल्य रत्न बताया।
घन्ना भाई: हंसी के पीछे छिपा संघर्ष
गढ़वाली सिनेमा में हास्य के पर्याय माने जाने वाले घन्ना भाई ने अपने जीवन में कई संघर्ष देखे, लेकिन कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कला के जरिए पहाड़ी समाज की खुशियों और तकलीफों को बड़े पर्दे पर उकेरा।
उनका निधन उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर के लिए एक गहरा आघात है। उनके योगदान को सम्मान देने के लिए कई कलाकारों और नेताओं ने सरकार से मांग की है कि उन्हें मरणोपरांत कोई राज्य स्तरीय सम्मान दिया जाए।




