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शहर की सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव: नगर निगम को मिली नई सफाई कंपनी
शहरी स्वच्छता का सीधा असर जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और स्थानीय जीवन स्तर पर पड़ता है। देश के कई हिस्सों में सफाई व्यवस्था की खामियां नागरिकों के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर रही हैं। देहरादून में भी लंबे समय से सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। पुरानी सफाई कंपनियां न केवल निर्धारित मानकों पर असफल साबित हो रही थीं, बल्कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी विफल रहीं। ऐसे में जिला प्रशासन ने कड़े फैसले लेकर नगर निगम की सफाई व्यवस्था को सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

रिपोर्ट के अनुसार:
नगर निगम के प्रशासक जिलाधिकारी सविन बंसल ने सफाई व्यवस्था में बदलाव के लिए व्यापक कदम उठाए। उन्होंने निष्क्रिय सफाई कंपनी को बाहर कर, नई कंपनी के चयन हेतु तीन महीने तक पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन किया। नई कंपनी, जो बड़े राज्यों जैसे यूपी, राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में सफलतापूर्वक अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाएं संचालित कर रही है, अब देहरादून में सफाई कार्यों की जिम्मेदारी संभालेगी।
इस कंपनी के पास अत्याधुनिक उपकरण, स्व-निर्मित टिफिंग वाहन, और मोबाइल आधारित रीयल-टाइम निगरानी तंत्र जैसी सुविधाएं हैं। कंपनी का दैनिक कचरा संग्रह औसतन 250 टीपीडी है, जबकि एकल यूएलबी में 1540 टीपीडी तक कचरा प्रबंधन का अनुभव है।
डीएम का नेतृत्व और प्रयास:
डीएम सविन बंसल ने अपने प्रशासक कार्यकाल के अंतिम दिनों तक शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयासरत रहे। उन्होंने पुराने अनुबंध के तहत काम कर रही कंपनियों को प्रदर्शन सुधारने का समय दिया था, लेकिन अपेक्षित सुधार न होने पर नई टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू की। नई कंपनी के साथ अनुबंध से नगर निगम को अब स्थायी और प्रभावी सफाई व्यवस्था मिलने की उम्मीद है।
नई कंपनी की विशेषताएं:
- स्व-निर्मित टिफिंग वाहन का उपयोग।
- आईएसओ प्रमाणित शिकायत निगरानी तंत्र।
- एआई आधारित कर्मचारी उपस्थिति प्रणाली।
- मोबाइल आधारित रीयल-टाइम कचरा संग्रह तंत्र।
- तीसरे वित्तीय वर्ष में 150 करोड़ का टर्नओवर।
डीएम ने स्पष्ट संदेश दिया है कि देहरादून की सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए कोई भी कदम उठाने में वे पीछे नहीं हटेंगे।



