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वनाग्नि रोकथाम और नियंत्रण के लिए तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित, सामूहिक प्रयासों पर दिया जोर
वनाग्नि प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला एक प्रमुख संकट है, जिससे हर वर्ष अनगिनत वन क्षेत्र, वन्यजीव और स्थानीय समुदाय प्रभावित होते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास और प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए दिनांक 11 जनवरी 2025 से चमोली जिले के गोपेश्वर में पुलिस विभाग, वन विभाग और प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में तीन दिवसीय वनाग्नि सुरक्षा और नियंत्रण प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ और उद्देश्य
कार्यशाला का शुभारंभ जिलाधिकारी चमोली सन्दीप तिवारी और पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार ने किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकारी अधिकारियों, वनकर्मियों और स्थानीय प्रतिनिधियों को वनाग्नि की रोकथाम और नियंत्रण के प्रभावी तरीकों से परिचित कराना था।
प्रतिभागियों और विषयवस्तु पर चर्चा
इस कार्यशाला में केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग, बद्रीनाथ वन प्रभाग, नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान, अलकनंदा भूमि संरक्षण और भूमि संरक्षण वन प्रभाग रानीखेत के वनकर्मियों ने भाग लिया। साथ ही, ग्राम पंचायतों के प्रधानों और चौकीदारों ने भी सक्रिय रूप से इसमें सहभागिता की।
पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार ने अपने संबोधन में वनाग्नि की आरंभिक पहचान, उसके कारणों और उसके प्रभावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने वनाग्नि की रोकथाम के लिए कानूनी उपायों को भी साझा किया।

प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु
फायर सर्विस के एलएफएम प्रदीप त्रिवेदी ने प्रशिक्षण सत्र का संचालन करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
- वनाग्नि के कारण और रोकथाम के उपाय: संभावित खतरों और उनकी पहचान।
- सुरक्षा उपाय: आग लगने के दौरान और उसके बाद की सुरक्षा प्रक्रियाएं।
- सामूहिक सहयोग: वनाग्नि रोकथाम में समुदाय और अधिकारियों के बीच समन्वय।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थिति
इस कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी नंदन कुमार, उप वन संरक्षक केदारनाथ तरुण एस, और प्रभागीय वनाधिकारी बद्रीनाथ सर्वेश कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।



