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बाल विवाह: समाज पर गहरा प्रभाव और कानूनी रोकथाम की आवश्यकता
बाल विवाह भारतीय समाज के लिए एक गंभीर समस्या है, जो बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को प्रभावित करती है। इस प्रथा के चलते बच्चों को शिक्षा और बेहतर भविष्य के अवसरों से वंचित होना पड़ता है। भारत में बाल विवाह अधिनियम 2006 लागू होने के बावजूद कई क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण ऐसी घटनाएं अब भी सामने आती हैं। कम उम्र में शादी के चलते लड़कियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जबकि लड़के अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं कर पाते।
कांडा क्षेत्र में बाल विवाह रोकने की कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 12 दिसंबर 2024 को जनपद बागेश्वर के कांडा क्षेत्र में एक नाबालिग की शादी की सूचना मिली। इस सूचना के आधार पर महिला हेल्पलाइन बागेश्वर, एंटी ह्यूमन ट्रैफिक यूनिट, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), वन स्टॉप सेंटर, चाइल्ड हेल्पलाइन टीम और थाना कांडा पुलिस की संयुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई की।
जांच में पाया गया कि लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम थी, जबकि लड़की की उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी थी। दस्तावेजों की जांच के बाद दोनों परिवारों को बाल विवाह अधिनियम के प्रावधानों के बारे में जानकारी दी गई। टीम ने लड़के और लड़की के परिजनों की काउंसलिंग की और उन्हें कानून का पालन करने के लिए जागरूक किया। काउंसलिंग के बाद लड़के के पिता ने लिखित में आश्वासन दिया कि वह अपने पुत्र का विवाह 21 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ही करेंगे।
स्थानीय लोगों को दी गई जागरूकता
पुलिस और अन्य टीमों ने मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों को बाल विवाह, बाल अपराध, महिला सुरक्षा, मानव तस्करी, साइबर क्राइम, नशा मुक्ति, यातायात नियमों और अन्य सामाजिक मुद्दों पर जागरूक किया। इसके साथ ही उत्तराखंड पुलिस द्वारा संचालित विभिन्न एप्स जैसे “उत्तराखंड पुलिस एप,” “गौरा शक्ति एप,” “देवभूमि एप,” और “उत्तराखंड ट्रैफिक आई एप” की जानकारी साझा की गई। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, डायल 112 और 1098 जैसे आपातकालीन नंबरों का महत्व भी बताया गया।
इस कार्रवाई ने न केवल एक बाल विवाह को रोका, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। ऐसे प्रयास सामाजिक सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।



