आप को बता दे
भिक्षावृत्ति: बच्चों के भविष्य पर गहरा संकट
भिक्षावृत्ति एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जो बच्चों के बचपन और उनके उज्ज्वल भविष्य को अंधकार में धकेल देती है। कई बार यह गतिविधि मजबूरी के कारण होती है, तो कई बार इसके पीछे संगठित अपराध के पहलू भी सामने आते हैं। बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित जीवन से वंचित कर उन्हें इस गलत रास्ते पर धकेलना न केवल उनके अधिकारों का हनन है, बल्कि समाज के विकास पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों का पुनर्वास और संरक्षण एक बड़ी चुनौती है, जिसे लेकर प्रशासन लगातार कार्य कर रहा है।
भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों का रेस्क्यू अभियान जारी

रिपोर्ट्स के अनुसार, जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में देहरादून में भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को रेस्क्यू करने का अभियान 6 दिसंबर से 9 दिसंबर तक चलाया गया। इस अभियान के तहत रेस्क्यू टीम ने घंटाघर, बल्लूपुर, कावली रोड और बसंत विहार क्षेत्रों से 9 बालक और 2 बालिकाओं को रेस्क्यू किया।
बाल कल्याण समिति को सौंपा गया मामला
रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों की सामान्य डायरी (GD) दर्ज करवाई गई और उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के आदेशानुसार, चार बालकों और एक बालिका को राजकीय शिशु सदन में रखा गया, जबकि एक बालिका को राजकीय बालिका निकेतन में भेजा गया। इसके अतिरिक्त, तीन बालकों को समर्पण (खुला आश्रय) में रखा गया।

पुनर्वास की दिशा में प्रयास
रेस्क्यू टीम के प्रयासों से इन बच्चों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया गया है। एक बालक को राजकीय शिशु सदन में और दो बालकों को समर्पण (खुला आश्रय) में स्थानांतरित किया गया। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि इन बच्चों के पुनर्वास और शिक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
यह अभियान यह दिखाता है कि प्रशासन बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है। लेकिन समाज के हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह ऐसे मामलों में सजगता दिखाए और भिक्षावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन को सहयोग करे।



