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गुमशुदा बच्चों की तलाश और पुनर्वास के लिए ऑपरेशन स्माइल का योगदान
बच्चों के गुमशुदा होने के मामले न केवल परिवारों को मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित करते हैं, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चुनौती बन जाते हैं। ऐसे मामलों में बच्चों को जबरन श्रम, मानव तस्करी, और शोषण का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए उत्तराखंड पुलिस द्वारा ऑपरेशन स्माइल अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें गुमशुदा बच्चों, महिलाओं और पुरुषों की तलाश और पुनर्वास सुनिश्चित किया जा रहा है।
ऑपरेशन स्माइल अभियान की सफलता: टिहरी गढ़वाल में दो नाबालिगों को सुरक्षित लौटाया गया
उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय के दिशा-निर्देशों के तहत 15 अक्टूबर 2024 से 15 दिसंबर 2024 तक ऑपरेशन स्माइल अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, जनपद टिहरी गढ़वाल पुलिस ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन और मार्गदर्शन में कई प्रयास किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, टिहरी गढ़वाल ऑपरेशन स्माइल टीम ने 5 दिसंबर 2024 को दो नाबालिग बच्चों को ढूंढकर उनके परिजनों के हवाले किया।
कैसे मिली सफलता:
ऑपरेशन स्माइल टीम द्वारा जानकी पुल, अस्था पथ, नाव घाट, और होटल-धर्मशालाओं में गुमशुदा लोगों की तलाश की जा रही थी। इसी दौरान, रामझूला क्षेत्र में होटल, दुकानों और आश्रमों की चेकिंग के दौरान दो नाबालिग बालकों को एक दुकान पर काम करते हुए पाया गया। टीम ने जब बच्चों से पूछताछ की तो उन्होंने सही जवाब नहीं दिया। सख्ती से पूछताछ करने पर एक बालक ने बताया कि वे अपने घर से झगड़कर बिना बताए निकल आए थे।
टीम ने दोनों बच्चों के परिजनों से संपर्क किया और उन्हें उनके सुपुर्द कर दिया। साथ ही, दुकान मालिक को सख्त हिदायत दी गई कि वह भविष्य में बच्चों से श्रम न करवाएं।
बच्चों का विवरण:
- सन्नी (उम्र 16 वर्ष)
- पिता का नाम: रामकुमार
- स्थायी पता: ग्राम बांके, थाना डंडारी, जिला बेगूसराय, बिहार
- वर्तमान पता: रायवाला, निकट रेलवे स्टेशन
- प्रिंस कुमार (उम्र 14 वर्ष)
- पिता का नाम: राम लखन
- स्थायी पता: उपरोक्त
टीम में शामिल अधिकारी:
- टीम प्रभारी एसआई अनिरुद्ध मैठाणी
- हेड कांस्टेबल निशांत रमोला
- महिला कांस्टेबल इंदु
ऑपरेशन स्माइल जैसी पहलें न केवल गुमशुदा लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में मदद करती हैं, बल्कि समाज को बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक बनाती हैं।



