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उत्तराखंड में औषधीय खेती को बढ़ावा देने की पहल
औषधीय पौधों की खेती किसानों की आय बढ़ाने और सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में औषधीय पौधे जैसे सर्पगंधा, सतावर और कुटकी प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। इन्हें औपचारिक रूप से फसल घोषित करने से किसानों को सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का सीधा लाभ मिल सकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, उत्तराखंड सरकार द्वारा औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए पहल की जा रही है।

केंद्रीय आयुष मंत्री से कृषि मंत्री की मुलाकात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को नई दिल्ली में उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान कृषि मंत्री ने राज्य में उत्पादित औषधीय फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र से विशेष सहयोग की मांग की।
कृषि मंत्री ने तेजपत्ता, तैमूर और चंदन को औपचारिक रूप से फसल घोषित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से इन उत्पादों को फसल घोषित करने से किसानों को वित्तीय सहायता और कृषि योजनाओं का लाभ मिलेगा। कृषि मंत्री ने बताया कि औषधीय पौधों के विकास से राज्य के किसानों को बड़ी आर्थिक संभावनाएं प्राप्त होंगी।

औषधीय पौधों पर चर्चा
मुलाकात के दौरान दोनों मंत्रियों के बीच सतावर, सर्पगंधा, कुटकी, तुलसी और कूट जैसे औषधीय पौधों के उपयोग और उनके व्यावसायिक लाभ पर चर्चा हुई। कृषि मंत्री ने बताया कि इन पौधों का उपयोग महत्वपूर्ण दवाओं के निर्माण में किया जा सकता है और इससे किसानों को बेहतर आय के अवसर मिल सकते हैं।
कृषि मंत्री ने केंद्रीय आयुष मंत्री को उत्तराखंड आने का निमंत्रण देते हुए पहाड़ी टोपी भेंट की। साथ ही, उन्होंने औषधीय फसलों के क्षेत्र में केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद जताई।



