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पौड़ी पुलिस ने एमबीबीएस छात्रों को साइबर फ्रॉड, नशे के दुष्परिणाम और रैगिंग के विषय में किया जागरूक
आजकल के डिजिटल युग में साइबर अपराध और नशे की लत युवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। इसके साथ ही, रैगिंग जैसी घटनाएं भी छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के लिए खतरे का कारण बन रही हैं। इन समस्याओं को लेकर पुलिस द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, पौड़ी पुलिस ने 28 नवंबर 2024 को राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के एमबीबीएस छात्रों को साइबर अपराध, नशे के दुष्परिणामों और रैगिंग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। चौकी प्रभारी श्रीकोट और पुलिस टीम द्वारा छात्रों से वार्ता की गई, जिसमें साइबर फ्रॉड, सोशल मीडिया से जुड़ी धोखाधड़ी और नशे के प्रभावों के बारे में बताया गया। इसके साथ ही रैगिंग निषेध अधिनियम 1999 के तहत छात्रों को इसके गंभीर दुष्परिणामों से अवगत कराया गया और “एंटी रैगिंग हेल्पलाइन” (टोल-फ्री नंबर 1800-180-5522) के बारे में जानकारी दी गई।
साथ ही साइबर फ्रॉड के बारे में छात्रों को बताया गया कि किस प्रकार से फर्जी लोन, लॉटरी जीतने, और अन्य लुभावने ऑफर्स के जरिए लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। इन अपराधों से बचने के लिए पुलिस ने छात्रों को सजग रहने और किसी भी संदिग्ध लिंक या फोन कॉल से सावधान रहने की सलाह दी।

यह जागरूकता कार्यक्रम पौड़ी पुलिस की ओर से जारी प्रयासों का हिस्सा है, ताकि छात्र-छात्राएं इन खतरों से सुरक्षित रह सकें और सही दिशा में कदम बढ़ा सकें।



