Sunday, March 29, 2026
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प्रमुख वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबन्धन की अध्यक्षता में गढ़वाल मण्डल से सम्बन्धित विभिन्न प्रभागों के फील्ड वनाधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला की गयी आयोजित

उत्तराखंड में बढ़ती तपिश के कारण फायर सीजन (15 फरवरी से) शुरू हो चुका है। जिसके परिणामस्वरूप, कई जगहों पर जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। तथा माह मई-जून में अत्यधिक आग लगने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। वनों को अग्नि दुर्घटनाओं से बचाने में जन सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह घटनाएं वन विभाग के लिए चुनौती बन जाती है। जिसके लिए वन विभाग जनता से सहयोग की हमेशा अपील करता है।

इस क्रम में आपको बता दे

  दिनांक 6.4.2024 को राजपुर रोड स्थित मंथन सभागार में वनाग्नि प्रबंधन के संबंध में बैठक आयोजित की गई 

प्रमुख वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबन्धन की अध्यक्षता में गढ़वाल मण्डल से सम्बन्धित विभिन्न प्रभागों के फील्ड वनाधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला की गयी आयोजित

उत्तराखण्ड बाहुल्य प्रदेश होने के साथ ही भिन्न-भिन्न विषम भौगोलिक संरचना के कारण वनाग्नि की  दृष्टि से अत्यन्त ही संवेदनशील प्रदेश है। ग्रीष्मकाल में प्रदेश के वन क्षेत्रों (विशेषकर चीड़ वनों में) वनाग्नि की घटनायें वृहद् पैमाने पर घटित होती है । वनाग्नि नियंत्रण एवं प्रबन्धन हेतु वन विभाग द्वारा अपने स्तर से समुचित आवश्यक प्रयास एवं व्यवस्थायें सुनिश्चित की जाती है । परन्तु वनाग्नि नियंत्रण / प्रबन्धन हेतु जन – सहभागिता अत्यन्त ही महत्वपूर्ण है । वनाग्नि घटनाओं हेतु चीड़ – पिरूल एक महत्तवपूर्ण घटक है। चीड़ बाहुल्य वन क्षेत्रों से चीड़ पिरूल के निस्तारण एवं उससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने हेतु वर्तमान में संचालित पिरूल पैलैट्स/ब्रिकेट एवं अन्य विभिन्न उत्पादों के निर्माण आदि के साथ ही वनाग्नि नियंत्रण / प्रबन्धन प्रभावी कार्यवाही के सम्बन्ध में दिनांक 06.04.2024 को श्री निशांत वर्मा, अपर प्रमुख वन संरक्षक, वनाग्नि एवं आपदा प्रबन्धन की अध्यक्षता में गढ़वाल मण्डल से सम्बन्धित विभिन्न प्रभागों के फील्ड वनाधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी। कार्यशाला में 35 अधिकारियों द्वारा भौतिक रूप से तथा 47 वनाधिकारियों द्वारा ऑनलाईन रूप से प्रतिभाग किया गया।

अपर प्रमुख वन संरक्षक, वनाग्नि एवं आपदा प्रबन्धन द्वारा सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया, उनके द्वारा वनाग्नि नियंत्रण / प्रबन्धन के सम्बन्ध में विस्तृत प्रस्तुतिकरण देते हुए प्रभागीय वनाधिकारियों अपेक्षा की गयी कि FSI से प्राप्त होने वाले alerts पर तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराते हुये । Action Taken Report प्रेषित करना, FSI से प्राप्त हो रहे Large Forest Fire Alerts पर प्रभागीय वनाधिकारियों का व्यक्तिगत ध्यान अपेक्षित है। इसमें प्रयास यह होना चाहिए की इसको कम से कम समय में नियंत्रित किया जाये, जिससे यह विकराल रूप न ले, जनपद स्तर पर समस्त रेखीय विभागों के अधिकारियों से समन्वय स्थापित करते हुये उनका अपेक्षित सहयोग लिया जाये, जिला स्तर पर Incidence Response Team गठित कराई जाये तथा सक्रिय ग्राम स्तरिय वनाग्नि सुरक्षा समिति / वन पंचायतों / महिला स्वंय सहायता समूह / महिला मंगल दल आदि का चिन्हिकरण करके एवं समीपस्थ वन क्षेत्रों में वनाग्नि नियंत्रण की जिम्मेदारी देते हुए वनाग्नि नियंत्रण की कार्यवाही की जाये ।

 

श्री धर्म सिंह मीणा, वन संरक्षक, भागीरथी वृत्त द्वारा मुख्य वन संरक्षक, गढ़वाल की ओर से वनाग्नि नियंत्रण / प्रबन्धन के सम्बन्ध में विस्तार से प्रस्तुतीकरण देते हुए मुख्य रूप से चीड़ वनों में घटित वनाग्नि घटनाओं का उल्लेख करते हुए लीसा घावों, वृक्षारोपणों आदि की सुरक्षा पर बल देते हुए वनाग्नि शमन की कार्यवाही पर बल दिया गया। इसके साथ ही श्री भरत सिंह, सेवानिवृत्त प्रान्तीय वन सेवा अधिकारी द्वारा वनाग्नि घटनाओं के कारणों, निवारण एवं सावधानियों के सम्बन्ध में विस्तार से अवगत कराया गया। इसी क्रम में श्री रितेश प्रतिनिधि GIZ द्वारा भी वनाग्नि घटनाओं की रोकथाम एवं उसके कारकों पर Forest ecosystem services पर प्रभाव के सम्बन्ध में प्रकाश डाला गया। डॉ० विनीत कुमार, वैज्ञानिक ई, भारतीय वन अनुसंधान संस्थान द्वारा चीड़ वनों में गिरने वाले पिरूल के उपयोग एवं पिरूल पैलैट्स / ब्रिकेट एवं अन्य विभिन्न उत्पादों के निर्माण आदि के सम्बन्ध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया ।

श्री सुनील चन्द्रा, उप निदेशक, भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा Real time Alerts, Large Forest Fire Alerts एवं वनाग्नि Geo portal के सम्बन्ध में जानकारी प्रस्तुत की गयी। श्री मनोज जोशी, उप कार्यक्रम अधिकारी, दि हंस फाउन्डेशन द्वारा वनाग्नि नियंत्रण / प्रबन्धन में जन-जागरूकता के साथ ही वन विभाग को फाउन्डेशन द्वारा किये जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों तथा दि हंस फाउन्डेशन द्वारा वनाग्नि की रोकथाम एवं प्रचार-प्रसार हेतु विभिन्न क्षेत्रों में स्वयंसेवकों को विकसित किये जाने के सम्बन्ध में जानकारी दी गयी। कार्यशाला में श्री नीरज कुमार प्रभागीय वनाधिकारी, देहरादून, श्री वैभव कुमार प्रभागीय • प्रभागीय वनाधिकारी, हरिद्वार, श्री के०एन० भारती – वनाधिकारी, भूमि संरक्षण कालसी, श्री उदय गौड – उप प्रभागीय वनाधिकारी, मसूरी, श्री अनिल सिंह रावत उप प्रभागीय वनाधिकारी, देहरादून के साथ ही अन्य अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन प्रभागों में फील्ड कार्मिकों को वनाग्नि प्रबन्धन हेतु त्वरित कार्यवाही के लिए तैयार रहने एवं विभाग में आये नवनियुक्त वन कार्मिकों का वनाग्नि प्रबन्धन हेतु क्षमता विकास किया जाना रहा है।

—अंत में उपस्थित समस्त अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए कार्यशाला सम्पन्न की गयी

 

 

 

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