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सरकारी धन का गबन: जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार उजागर, एक गिरफ्तार
क्या जनता के हक का पैसा इसी तरह लूटा जाएगा? जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन भ्रष्टाचार ने इसे भी अपनी चपेट में ले लिया है। गरीब जनता जिन सुविधाओं की हकदार है, उन्हें देने के बजाय सरकारी धन का गबन कर लिया जाता है। सवाल उठता है—कब तक सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग यूं ही जारी रहेगा?
जल जीवन मिशन योजना में ₹2 लाख के गबन का मामला, एक गिरफ्तार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद चंपावत के थाना रीठा साहिब क्षेत्र में जल जीवन मिशन योजना के तहत स्वीकृत ₹2 लाख की धनराशि में गबन का मामला सामने आया है। इस मामले में आरोपी भुवन चंद्र भट्ट को गिरफ्तार कर लिया गया है।
शिकायतकर्ता मोहन नाथ गोस्वामी ने पुलिस को सूचना दी कि गांव में जल जीवन मिशन के तहत कोई कार्य नहीं किया गया, जबकि ₹2 लाख की राशि निकाल ली गई। जांच के दौरान पता चला कि तिलोमणि भट्ट और उनके पुत्र भुवन चंद्र भट्ट ने फर्जी प्रस्ताव बनाकर ब्लॉक कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का गबन किया।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने 17 फरवरी 2025 को चेकिंग अभियान के दौरान एक पिकअप वाहन (UK03CA-0635) को रोका, जिसमें 39 पाइप, 31 सॉकेट, 06 यूनियन और 02 एल्बो बरामद किए गए। वाहन चालक की पहचान भुवन चंद्र भट्ट के रूप में हुई। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि ये पाइप चोरी-छुपे धरसो क्षेत्र में लगाए जाने थे।
पुलिस ने बरामद सामग्री के आधार पर भुवन चंद्र भट्ट को गिरफ्तार कर लिया और न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। बरामद सामान की कीमत लगभग ₹50,000 आंकी गई है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
भ्रष्टाचार पर कब लगेगी लगाम?
सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की घटनाएं जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं। जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन जब इसी पैसे का गबन होता है, तो जरूरतमंद जनता बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह जाती है। प्रशासन को चाहिए कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



